Zulf Bikhra Ke Nikle Woh Ghar Se by Ahmed and Mohammed Hussain

Zulf Bikhra Ke Nikle Woh Ghar Se

जुल्फ बिखरा के……
जुल्फ बिखरा के निकले वो घर से (2 ) देखो बदल कहाँ आज बरसे
फिर हुई धड़कने तेज दिल की
धड़कने…… धड़कने……
फिर वो गुजरे हैं वो सायद इधर से (2 ) देखो बदल कहाँ आज बरसे
मैं हर एक हल में आप का हूँ
आप का हूँ (3 )
मैं हर एक हल में आप का हूँ (2 )
आप देखे मुझे जिस नज़र से , देखो बदल कहाँ आज बरसे
जिंदगी वो संभाल ना सकेगी गिर गई जो तुम्हारी नज़र से
देखो बदल कहाँ आज बरसे, जुल्फ बिखरा के निकले वो घर से
बिजलियों की तवज्जो में बेकल , आशियाना बनावो शहर से
देखो बदल कहाँ आज बरसे, जुल्फ बिखरा के निकले वो घर से (2 )